पंडित बृज नारायण चकबस्त और उनकी शायरी

पण्डित बृज नारायण चकबस्त और उनकी शायरी।

अक्षय मेल समाचार

अमेठी(ब्यूरो):-

एन0सी0पी0यू0एल0 नई दिल्ली के सौजन्य से ओकार सेवा संस्थान अमेठी द्वारा पूरे गौहर अमेठी में चकबस्त और उनकी शायरी विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सिंहानिया विश्वविद्यालय राजस्थान के कुलपति डाॅ0 मोइनुद्दीन ने अपने उद्बोधन में कहा कि एशिया में यूरोपियन सभ्यता के विस्तार के दौरान उर्दू दोयम दर्जे की भाषा बन गयी। आज के परिवेश में उर्दू के प्रचार-प्रसार की बहुत जरूरत है। संस्था इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रही है। जिले के प्रसिद्ध उर्दू शायर इंजीनियर बेचू खां ने सेमिनार को सम्बोधित करते हुए कहा कि उर्दू भाषा का उद्भव तेरहवीं शताब्दी में ईरान में हुआ इसमें 39 शब्द हैं। विभिन्न विदेशी आक्रन्ताओं मुगल, तुर्क, अफगान आदि शासकों की सेनाएं भारत पर आक्रमण की, जिसमें तुर्क, पर्सियन, पठान, बलोच, जाट तथा अफगानी मुल्क की सेना रहती थी। इनके बीच परस्पर सम्वाद करने की भाषा को उर्दू कहा गया। उर्दू भाषा में आज भी सत्तर प्रतिशत शब्द फारसी, अरबी, तुर्की, फ्रेंच, पुर्तगाली तथा डच भाषा के हैं। उर्दू भाषा में गीत-गजल की शुरूआत अमीनुद्दीन खुसरो से हुई। संस्था के महासचिव सूर्य कुमार त्रिपाठी ने पंडित बृज नारायण चकबस्त के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालने हुए कहा कि चकबस्त का जन्म फैजाबाद में सन् 1882 ई0 में हुआ उस समय इनके पिता पंडित उदित नारायण फैजाबाद में डिप्टी कलेक्टर के पद पर तैनात थे। जन्म के कुछ ही वर्ष उपरान्त इनके पिता का स्वर्गवास हो गया। बृज नारायण चकबस्त प्रारम्भ से ही कुशाग्र बुद्धि के थे। इन्होंने सन् 1905 में बी0ए0 की डिग्री तथा 1907 में एल0एल0बी0 की डिग्री हासिल की। इनकी कविताओं में राष्ट्रभक्ति कूट-कूटकर भरी हुई है। इनकी पहली नज्म 1894 में 50 गजलों के साथ मशहूर हुई। इन्होंनें रामायण का भी उर्दू में अनुवाद करना शुरू किया था किन्तु अल्पआयु (44 वर्ष) में मृत्यु हो जाने के कारण वह काम पूरा न हो सका। इतने कम समय में भी इन्होनें उर्दू साहित्य में जो स्थान हासिल किया है वह सदैव सुरक्षित रहेगा। सेमिनार की अध्यक्षता हाफिज रायबरेलबी, संचालक एम0जी0एस0 सुलतानपुर के प्रवक्ता डाॅ0 आमिल सिद्दीकी ने की। सेमिनार को डाॅ0 वजहुल कमर पूर्व प्राचार्य गनपत सहाय पी0जी0 काॅलेज सुलतानपुर, डाॅ0 तौहीद, डाॅ0 जुनेद, डाॅ0 अशरफ, डाॅ0 राजेश कुमार शुक्ल, डाॅ0 शशांक शेखर त्रिपाठी, दीदी गुडम्बा सहित लगभग दो दर्जन राष्ट्रीय स्तर के विद्वानों ने सम्बोधित किया। सेमिनार में मो0 तौफीक अहमद, साबिर भाई, धमेन्द्र त्रिपाठी, शुभम त्रिपाठी, मानधारा सिंह, सुशील शुक्ला, पंकज कुमार सहित हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।

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